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Smart India blog: Investment, Career, Travel and Technology

"कस्टम्स बैगेज रूल्स 2026: विदेश से लाए गए गहनों पर अब केवल वज़न की सीमा"

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  भारत सरकार ने कस्टम्स बैगेज रूल्स 2026 लागू किए हैं। अब महिलाएँ 40 ग्राम, पुरुष 20 ग्राम और बच्चे 40 ग्राम तक गहने बिना शुल्क ला सकते हैं। मूल्य सीमा हटाकर केवल वज़न सीमा तय की गई है, जिससे प्रवासी भारतीयों को बड़ी राहत मिलेगी।

💰“आज का सोना–चाँदी का रेट और भविष्य का रुझान”

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  दोस्तों, बाज़ार में इन दिनों सोना–चाँदी के भाव में खूब हलचल मची हुई है। 2 फरवरी 2026 को हमने देखा कि दोनों धातुओं में गिरावट आई है। लेकिन घबराने की ज़रूरत नहीं है, यह कोई क्रैश नहीं बल्कि एक हेल्दी करेक्शन है।

“बजट 2026 – घोषणाओं से ज़्यादा अनुशासन”

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  प्रस्तावना        भारत का हर बजट आम जनता और निवेशकों के लिए उम्मीदों का केंद्र होता है। लोग नई योजनाओं और राहत की घोषणाओं की प्रतीक्षा करते हैं। लेकिन इस बार, बजट 2026 का फोकस ज़्यादा ऐलानों पर नहीं बल्कि वित्तीय अनुशासन (Fiscal Prudence) पर रहने की संभावना है।

📉 15 साल में सबसे बड़ी गिरावट: सोना-चांदी निवेशकों के लिए क्या मायने रखती है?

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  इंट्रोडक्शन निवेशकों को बड़ा झटका लगा है—चांदी में 15 साल की सबसे बड़ी गिरावट दर्ज की गई है और सोना भी लुढ़क गया है। यह गिरावट न सिर्फ ट्रेडर्स बल्कि आम निवेशकों के लिए भी चिंता का विषय है। सवाल यह है कि क्या यह “Buy the Dip” का मौका है या इंतजार करना बेहतर होगा गिरावट के कारण डॉलर की मजबूती – अमेरिकी डॉलर के मजबूत होने से कीमती धातुओं की कीमतों पर दबाव। ग्लोबल मार्केट्स में अस्थिरता – फेडरल रिज़र्व की नीतियों और ब्याज दरों का असर। प्रॉफिट बुकिंग – निवेशकों ने हाल की तेजी के बाद मुनाफा निकालना शुरू किया निवेशकों पर असर छोटे निवेशक – जिनके पोर्टफोलियो में सोना-चांदी है, उन्हें नुकसान का सामना करना पड़ सकता है। संस्थागत निवेशक – गिरावट को लॉन्ग-टर्म खरीदारी का मौका मान सकते हैं। आम उपभोक्ता – शादी-ब्याह और ज्वेलरी खरीदने वालों के लिए यह राहत की खबर हो सकती है क्या करें निवेशक? शॉर्ट-टर्म ट्रेडर्स – अभी सावधानी बरतें, वोलैटिलिटी ज्यादा है। लॉन्ग-टर्म निवेशक – गिरावट को अवसर मानकर धीरे-धीरे निवेश बढ़ा सकते हैं। Diversification ज़रूरी है – सिर्फ सोना-चांदी पर निर्...

“MoEngage का Reverse Flip – US से India

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  परिचय भारत का स्टार्टअप इकोसिस्टम लगातार मज़बूत हो रहा है। इसी बीच SaaS स्टार्टअप MoEngage ने एक बड़ा फैसला लिया है – अपनी कंपनी का मुख्यालय US से हटाकर (Bengaluru) भारत में लाना। हाल ही में National Company Law Tribunal (NCLT) ने इस प्लान को मंज़ूरी दी है। यह कदम न सिर्फ MoEngage के लिए बल्कि पूरे भारतीय SaaS सेक्टर के लिए एक अहम संकेत है। Reverse Flip क्या है? जब कोई भारतीय स्टार्टअप शुरुआत में US या किसी अन्य देश में रजिस्टर होता है और बाद में अपना मुख्यालय वापस भारत लाता है, इसे Reverse Flip कहा जाता है। ऐसा करने से कंपनी को भारतीय मार्केट, टैलेंट और कैपिटल मार्केट का बेहतर फायदा मिलता है। MoEngage का सफर MoEngage एक Bengaluru-बेस्ड SaaS कंपनी है जो मार्केटिंग ऑटोमेशन और कस्टमर एंगेजमेंट सॉल्यूशंस देती है। पहले इसका Delaware (US) में होल्डिंग स्ट्रक्चर था, जिसे अब भारतीय कंपनी में मर्ज किया जाएगा। दिसंबर 2025 में MoEngage ने $280 मिलियन फंडिंग जुटाई थी और कंपनी की वैल्यूएशन $850 मिलियन तक पहुँच गई थी। इस कदम के फायदे भारतीय टैलेंट तक सीधी पहुँच – Bengaluru SaaS...

“BRICS Digital Currency vs Dollar 2026: Gold & Silver Investment Guide”

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  ✍️ Introduction (परिचय) आज दुनिया की अर्थव्यवस्था में सबसे बड़ी बहस अमेरिकी डॉलर और BRICS देशों की नई डिजिटल करेंसी को लेकर है। BRICS (ब्राज़ील, रूस, भारत, चीन और दक्षिण अफ्रीका) डॉलर पर निर्भरता कम करना चाहते हैं और इसके लिए साझा डिजिटल करेंसी की योजना बना रहे हैं। इस बदलाव का सीधा असर निवेशकों पर पड़ेगा, खासकर उन लोगों पर जो गोल्ड और सिल्वर में निवेश करते हैं। इस ब्लॉग में हम समझेंगे कि BRICS डिजिटल करेंसी से डॉलर की ताक़त कैसे बदल सकती है और इसका असर आपके निवेश पर क्या होगा BRICS डिजिटल करेंसी क्या है? BRICS देश डॉलर पर निर्भरता कम करना चाहते हैं। इसके लिए वे एक साझा डिजिटल करेंसी बनाने पर विचार कर रहे हैं। भारत का RBI पहले से ही डिजिटल रुपया (CBDC) पर काम कर रहा है अमेरिकी डॉलर की ताक़त अभी लगभग 60% ग्लोबल रिज़र्व अमेरिकी डॉलर में है। तेल और अंतरराष्ट्रीय व्यापार ज़्यादातर डॉलर में होता है। डॉलर की मजबूती का मतलब है कि सोने और चाँदी की कीमतें अक्सर डॉलर से जुड़ी रहती हैं BRICS करेंसी का असर Gold पर अगर डॉलर कमजोर होता है, तो सोने की कीमतें बढ़ सकती हैं । भारत औ...

"₹5000 से करोड़पति बनने की शुरुआत: 72 का नियम आपके लिए

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  72 का नियम: जल्दी अमीर बनने और रिटायर होने का आसान तरीका क्या आप भी चाहते हैं कि आपकी कमाई दोगुनी हो जाए? क्या आप सोचते हैं कि रिटायरमेंट के बाद आराम की ज़िंदगी कैसे जिएं? अगर हाँ, तो आज हम आपको बताएंगे एक ऐसा आसान गणितीय फॉर्मूला जो आपकी सोच को बदल सकता है—इसका नाम है "72 का नियम" 72 का नियम क्या है? 72 का नियम एक आसान तरीका है यह जानने का कि आपकी कोई भी निवेश राशि कितने सालों में दोगुनी हो जाएगी। इसके लिए आपको बस अपनी सालाना ब्याज दर (Interest Rate) को 72 से भाग देना है फॉर्मूला: 72 ÷ ब्याज दर (%) = पैसे दोगुने होने में लगने वाले साल उदाहरण के लिए, अगर आप किसी ऐसी स्कीम में पैसा लगाते हैं जो सालाना 8% रिटर्न देती है, तो: 72 ÷ 8 = 9 साल यानि आपका पैसा 9 साल में दोगुना हो जाएगा। ये नियम क्यों ज़रूरी है ? हम में से ज़्यादातर लोग निवेश तो करते हैं, लेकिन यह नहीं समझते कि उसका असर लंबे समय में कितना हो सकता है। 72 का नियम आपको यह समझने में मदद करता है कि: किस निवेश में पैसा जल्दी बढ़ेगा कौन-सी स्कीम आपके लिए फायदेमंद है और आप कितनी जल्दी आर्थिक रूप से स्वतंत्र हो सकते हैं ...